जीएसडीएस कार्यक्रम

'आग़ाज़ ए दोस्ती

स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर देशभर के विभिन्न गैर राजनीतिक स्वयं सेवी संगठनों की ओर से राजघाट स्थित गांधी दर्शन से 'आग़ाज़ ए दोस्ती' का शुभारंभ हुआ । यह यात्रा खादी आश्रम, पानीपत, शहीद भगत सिंह के जन्मस्थान खटकड़ कलां, गदरी बाबया की स्मृति में जालंधर स्थित देशभक्त यादगार हॉल, दुद्दी कलां में लाला लाजपतराय के जन्मस्थान मोगा होते हुए हुसैनीवाला स्थित भगत सिंह के समाधिस्थल पहुचकर सम्पन्न होगी ।

सत्ता परिवर्तन नहीं हृदय परिवर्तन से सार्थक होगी आज़ादी : डॉ सुब्बाराव

प्रसिद्ध गांधीवादी स्वतंत्रता सेनानी पद्मश्री डॉ एस एन सुब्बाराव ने कहा है कि गाँधी जी के लिए आज़ादी का अर्थ था- स्वराज प्राप्ति. वे मानते थे कि केवल सत्ता परिवर्तन से नहीं, अपितु भारतवासियों के हृदय परिवर्तन से आज़ादी सार्थक होगी.
श्री सुब्बाराव आज गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति द्वारा आयोजित ई राष्ट्रीय सम्मेलन “ स्वतन्त्रता आन्दोलन पर गांधीजी का प्रभाव” में बतौर मुख्य वक्ता अपने विचार प्रकट कर रहे थे. यह सम्मेलन आज़ादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था. श्री सुब्बाराव ने कहा कि गांधीजी की जीवन यात्रा एक डरपोक व्यक्ति से साहसी व्यक्ति बनने की है. सभी युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए. अतीत की स्मृतियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत छोडो आन्दोलन के समय वे स्कूल में पढ़ते थे. उन्हें भारत माता की जय बोलने और खादी पहनने के कारण गिरफ्तार कर लिया गया था.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, सिक्किम के पूर्व राज्यपाल डॉ बी पी सिंह ने कहा कि गाँधी कहते थे कि सभी धर्म हमें सिखलाते है कि हम सभी आपसी सद्भाव से एकजुट होकर रहें. गाँधी जी ने सदैव शांति, सद्भाव, अहिंसा और परस्पर स्नेह की समाज में बहाली के लिए काम किया.
राष्ट्रीय गाँधी संग्रहालय के पूर्व निदेशक डॉ वाई पी आनंद ने कहा कि महात्मा गांधी मात्र एक व्यक्ति नहीं अपितु विचार हैं. उनके विचार हमारे जीवन के उत्थान के लिए बहुत आवश्यक हैं. आज़ादी के आन्दोलन की सफलता की कल्पना गांधी के बिना नहीं की जा सकती.
एशिया पेसिफिक रिसर्च एसोसिएशन की डॉ. विद्या जैन ने गांधीजी को महिला उत्थान का सबसे बड़ा पैरोकार बताया. उन्होंने कहा कि गाँधी जी समाज में महिलाओं की स्थिति के उत्थान के लिए प्रयासरत रहे.... Read More

“स्वतन्त्रता आन्दोलन में महात्मा गांधी का योगदान अतुलनीय”

5/08/2021
स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ के मौके पर आज़ादी के अमृत महोत्सव के तहत आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में आज गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति द्वारा तृतीय ई क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया. सेंट टेरेसा कॉलेज एरनाकुलम के गांधी पीस और नॉन वायलेन्स स्टडी सेन्टर के सौजन्य से आयोजित इस सम्मेलन में वक्ताओं द्वारा स्वतन्त्रता आन्दोलन में महात्मा गांधी का प्रभाव विषय पर विमर्श किया गया.
सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि अपने विचार प्रकट करते हुए गुजरात विद्यापीठ के प्राध्यापक और वरिष्ठ चिंतक एम.पी. मथाई ने कहा कि आज़ादी के आन्दोलन में महात्मा गांधी का विशेष योगदान था. चम्पारण आन्दोलन से लेकर आज़ादी प्राप्ति तक का समय इतिहास में उनके ही नाम रहा. उनके सानिध्य में अनेक सेनानियों ने अपने व्यक्तित्व को निखारा. नेहरु, पटेल, विनोबा, कृपलानी, कमला नेहरु, कुमारप्पा जैसे नेता उनकी ही देन हैं. उनका जीवन एक खुली किताब की तरह रहा. हमें इनके जीवन से काफी कुछ सिखने को मिल सकता है.
समिति निदेशक श्री दीपंकर श्री ज्ञान ने कहा की स्वतन्त्रता आन्दोलन में गांधीवाद का पूरा प्रभाव रहा. हम आज आज़ादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम के जरिये आज़ादी के सिपाहियों को याद कर रहे है. इस कार्यक्रम की शुरुआत 12 मार्च को माननीय प्रधानमंत्री ने साबरमती आश्रम से की थी.
समेलन में गाँधी पीस और नॉन वायलेंस स्टडी सेंटर की स्निग्धा प्रदीप मेक्स्लिन एम मेक्सी, कालीकट विश्वविद्यालय के प्रो. आर सुन्दरन ने भी अपने विचार रखे. इस कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी सेंट टेरेसा कॉलेज एरनाकुलम की डॉ प्रीति कुमार ने दी. कार्यक्रम का संचालन डॉ लता नायर और डॉ प्रीती कुमार ने संयुक्त रूप से किया.

स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी का योगदान अविस्मरणीय

गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति द्वारा आज “भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में महात्मा गांधी का प्रभाव” विषय पर तीसरे ई क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया. समिति द्वारा यह कार्यक्रम जमशेदपुर महिला कॉलेज जमशेदपुर के सहयोग से आयोजित किया गया. सम्मेलन में विश्व भारती शांति निकेतन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिद्युत चक्रवर्ती मुख्या अतिथि थे.
इस अवसर पर अपने विचार प्रकट करते हुए प्रो चक्रवर्ती ने कहा कि वकील मोहनदास की महात्मा गांधी बनने की यात्रा को समझने के लिए हमें इतिहास में देखना होगा. पहले दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह, फिर चम्पारण आंदोलन से लेकर आजादी के संघर्ष में उनकी हिस्सेदारी. इस तरह एक संघर्षशील प्रक्रिया से गुजरकर वे महात्मा गांधी बने. आजादी की लडाई में उनका योगदान अविस्मरणीय है.आज़ादी के आन्दोलन में महात्मा गांधी का विशेष योगदान था.
विकास भारती बिशनपुर के संस्थापक सचिव पद्मश्री अशोक भगत ने कहा कि गांधी जी भारत की सनातन परंपरा को साथ लेकर चले. अपने गुरु गोखले की सलाह पर उन्होंने भारत का भ्रमण कर भारत को जाना. उनकी अहिंसा की अवधारणा भारत की ‘अहिंसा परमो धर्म:’ की पुरातन परंपरा से प्रेरित है.  समिति निदेशक श्री दीपंकर श्री ज्ञान ने कहा कि गांधी जी के आंदोलन अहिंसा के प्रतीक है. वे अहिंसा को लेकर बहुत सजग थे. यही कारण है कि जब चौरी-चौरा में हिंसा हुई, तो उन्होंने तुरंत अपना आंदोलन वापस ले लिया. उनकी अहिंसा की अवधारणा आज भी प्रासंगिक है. सम्मेलन में जमशेदपुर महिला कॉलेज की प्राचार्य डॉ. शुक्ला मोहंती ने कहा कि आजादी की वर्षगांठ मनाना तभी सार्थक होगा, जब हम स्त्री की स्वतंत्रता सुनिश्चित करेंगे.इस अवसर पर सनातन दीप, राजदीप पाठक सहित अनेक गणमान्य लोगों ने भी... Read More

द्वितीय ई सम्मेलन का आयोजन 

स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ के मौके पर आज़ादी के अमृत महोत्सव के तहत आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में आज गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति द्वारा द्वितीय ई क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस सम्मेलन का विषय था-भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में महात्मा गांधी का प्रभाव. समिति द्वारा यह कार्यक्रम गुजरात विद्यापीठ के गांधी अध्ययन और शांति शोध केंद्र और बिरला कॉलेज कल्याण के सहयोग से आयोजित किया गया था. सम्मेलन में समिति के “अहिंसक संचार ” पाठ्यक्रम के गुजराती संस्करण का शुभारम्भ भी किया गया.
इस ई सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि अपने विचार प्रकट करते हुए गुजरात विद्यापीठ के कुलपति श्री राजेंद्र खिमानी ने कहा कि आज़ादी के आन्दोलन में महात्मा गांधी का विशेष योगदान था. यह उन्हीं का प्रभाव था कि आम जनमानस ने अहिंसा और शान्ति के पथ पर कदम बढाते हुए आज़ादी प्राप्त की. 
गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति की कार्यकारी परिषद् की सदस्या श्रीमती रजनी बक्षी ने कहा कि प्रेम अहिंसा का प्रमुख रूप है. गांधीजी ने प्रेम के कई रूपों पर बात की. हमें प्रेम की भावनाओं को सदैव जीवित रखने का प्रयास रखना है. क्योंकि घृणा से हम किसी भी समस्या का हल नहीं पा सकते. आपसी सद्भावना, प्रेम और अहिंसा ये हमारे आज़ादी के आन्दोलन की नींव का पत्थर रहें हैं. समिति निदेशक श्री दीपंकर श्री ज्ञान ने कहा की स्वतन्त्रता आन्दोलन में गांधीवाद का पूरा प्रभाव रहा. उनकी अहिंसा की अवधारणा आज भी प्रासंगिक है. सम्मेलन में बीके बिरला कॉलेज के  निदेशक डॉ नरेश चन्द्र ने भी अपने विचार रखे. समिति के कार्यक्रम अधिकारी डॉ वेदाभ्यास कुंडू ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया. कार्यक्रम का संचालन मुंबई विश्वविद्यालय की डॉ नमिता निम्बालकर... Read More

वीआईपी दौरे-

पेसिफिक एयर फ़ोर्स के कमांडर के पति ने गांधी स्मृति का दौरा किया.
-महापौर, दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने गांधी दर्शन का दौरा किया
दक्षिण कोरिया गणराज्य के माननीय रक्षा मंत्री, श्री सुह वुक ने गाँधी स्मृति का दौरा किया.
राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज के अधिकारी ने गांधी स्मृति की यात्रा की.
2 मार्च, 2021
गांधी स्मृति
श्रीमती सिंडी विल्सबाक, ने अपनी टीम के साथ, 2 मार्च, 2021 को गांधी स्मृति का दौरा किया। डॉ सेलजा गुलपल्ली, रिसर्च एसोसिएट ने आगंतुकों का स्वागत किया.
4 मार्च, 2021
गांधी स्मृति
सुश्री अनामिका मिथिलेश, दक्षिण दिल्ली नगर निगम की महापौर ने 4 मार्च, 2021 को राजघाट गांधी दर्शन का दौरा किया। उन्होंने परिसर में स्थापित प्रदर्शनी में उत्सुकता से रुचि ली। उन्हें निदेशक समिति निदेशक श्री दीपंकर श्री ज्ञान द्वारा सम्मानित किया गया ।
26 मार्च, 2021
गांधी स्मृति
दक्षिण कोरिया गणराज्य के माननीय रक्षा मंत्री, श्री सुह ने अन्य अधिकारियों के साथ 26 मार्च, 2021 को गांधी स्मृति का दौरा किया और महात्मा गांधी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ। सेलेजा गुलपल्ली, रिसर्च एसोसिएट द्वारा उन्हें संग्रहालय का दौरा करवाया गया।
30 मार्च-1 अप्रैल, 2021
गांधी स्मृति
राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों ने 30 मार्च और 1 अप्रैल, 2021 को गांधी स्मृति में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ सेलेजा गुलपल्ली ने अथितियों का अभिनन्दन किया.

अहिंसक संचार के माध्यम से अभद्र भाषा का मुकाबला करने पर ई-संवाद

समिति के कार्यक्रम अधिकारी, डॉ वेदाभ्यास कुंडु ने नफरत भरी बातों के खतरे का मुकाबला करने के लिए अहिंसक संचार के गांधीवादी मॉडल की शुरुआत की। प्रोफेसर जुआन पेड्रो यूनिवर्सिडैड डीए मैड्रिड, स्पेन ने 18 मार्च, 2021 को अहिंसक संचार के माध्यम से नफरत भरे भाषण को नियंत्रित करने पर ई-वार्ता की।

'लेखक से मिलिये' कार्यक्रम का आयोजन

गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति ने 24 मार्च 2021 को दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज के सभागार में 'लेखक से मिलो' कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. के.एन. तिवारी की पुस्तक 'उत्तर कबीर-नंगा फकीर' पर चर्चा हुई। यह पुस्तक गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति द्वारा प्रकाशित की गई है। इस मौके पर अपने भाषण में डॉ. ओमप्रकाश ने कहा कि साहित्य समाज के लिए प्रेरणा का काम करता है. इस पुस्तक में लेखक ने कबीर और गांधी के काल्पनिक संवाद के माध्यम से देश और समाज की विसंगतियों को उजागर किया है।

न्यूरो-भाषाई-प्रोग्रामिंग पर मध्यस्थता भाग-VI पर संवाद

समिति ने 8 मार्च, 2021 को 'न्यूरो लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग' (एनएलपी) पर मध्यस्थता पर एक संवाद का आयोजन किया। संवाद की श्रृंखला में आयोजित इस छठे कार्यक्रम में सुश्री सलोनी प्रिया, निदेशक उम्मीद काउंसिल एंड कन्सलटेंट व सलाहकार सांस्कृतिक अनुसंधान और प्रशिक्षण (सीसीआरटी) ने प्रमुख व्याख्यान दिया.
सुश्री मानसी शर्मा ने संवाद का संचालन किया, जिसके दौरान सुश्री सौलनी प्रिया ने एनएलपी से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर बात की और विस्तार से बताया कि इसका वास्तव में क्या मतलब है। उसने कहा, "'न्यूरो' तंत्रिका तंत्र को संदर्भित करता है जिसके माध्यम से अनुभवों को सचेत या अचेतन विचार में अनुवादित किया जाता है"; "भाषाई' से तात्पर्य है कि लोग कैसे संवाद करते हैं और अनुभवों को समझने के लिए भाषा का उपयोग कैसे किया जाता है.

महात्मा गांधी और विनोबा भावे पर संगोष्ठी

समिति के सहयोग से उत्तर क्षेत्र के खादी संस्थानों और संघों द्वारा गांधी दर्शन में 5 मार्च, 2021 को महात्मा गांधी और विनोबा भावे पर एक सेमिनार आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री बसंत कुमार, सदस्य खादी और ग्रामोद्योग आयोग, उत्तर क्षेत्र थे। अध्यक्षता श्री समिति निदेशक श्री दीपंकर श्री ज्ञान ने की। श्री लक्ष्मी दास और श्री माम चंद शर्मा ने भी सभा को संबोधित किया। खादी संस्थाओं के विभिन्न प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम में अपने विचार रखे।

पत्रकारिता में सत्य साधना पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति और दिल्ली पत्रकार संघ (डीजेए) ने 1 मार्च, 2021 को गांधी दर्शन, राजघाट में पत्रकारिता में सत्य साधना पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया। उत्तरी दिल्ली के मेयर, श्री जय प्रकाश इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे। इस अवसर पर समिति निदेशक श्री दीपंकर श्री ज्ञान, श्री ओंकारेश्वर पांडे, वरिष्ठ पत्रकार; श्री मनोहर सिंह, अध्यक्ष, डीजेए; श्री अमलेश राजू, वरिष्ठ पत्रकार, श्री मनोज मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार, डॉ. वेदभ्यास कुंडू, कार्यक्रम अधिकारी, सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के अध्यक्ष पद्मश्री राम बहादुर राय वस्तुतः इस अवसर पर शामिल हुए

साबरमती से दांडी यात्रा को हरी झंडी दिखाकर आजादी के अमृत महोत्सव का शुभारम्भ

ऐतिहासिक दांडी मार्च की 91वीं वर्षगांठ पर भारत के माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद से 25 दिवसीय 'दांडी मार्च' को हरी झंडी दिखाई, जिसका समापन 6 अप्रैल को नवसारी जिले के दांडी में 12 मार्च, 2021 को हुआ। श्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर 'आजादी का अमृत महोत्सव' कार्यक्रम का भी शुभारंभ किया। यह महोत्सव 15 अगस्त, 2023 तक चलेगा। भारत 15 अगस्त, 2022 को 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा।
इस अवसर पर माननीय संस्कृति मंत्री एवं समिति उपाध्यक्ष श्री प्रहलाद सिंह ने भी साबरमती से नादियाड तक अपनी पदयात्रा (मार्च) शुरू की। समिति निदेशक श्री दीपंकर श्री ज्ञान और अन्य अधिकारियों के साथ गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के लगभग 27 स्वयंसेवकों सहित कुल 110 स्वयंसेवकों की एक टीम का नेतृत्व करते हुए, श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने नडियाद तक 75 किलोमीटर की दूरी तय की। नडियाद पहुंचने से पहले, उन्होंने चंदोला तालाब असलाली, बरेजा, नवगम, वासना, मातर और दभान जैसे स्थानों की यात्रा की.
यात्रा में भाग लेने वालों में श्रीमती गीता शुक्ला, शोधअधिकारी, श्री रिजवान उर रहमान, श्री जगदीश प्रसाद, श्री अरबिंदो मोहंती, श्री दिलीप कुमार, श्री नरेंद्र कुमार, श्री यतेंद्र सिंह, श्री प्रवीण दत्त शर्मा, श्री पीयूष हलदर, श्री विवेक कुमार, श्री दीपक तिवारी, श्री दीपक पांडे, श्री सुनील, श्री नवीन, श्री महेंद्र सिंह, श्री धर्म पाल, श्री राकेश शर्मा, श्री हरेन्द्र, श्री गणेश, श्री मनीष, श्री धनराज, श्री मनीष कुमार, श्री धर्मराज कुमार, श्री अरविंद कुमार और श्री अरुण सैनी शामिल थे.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल के नेतृत्व में 75 किलोमीटर की दांडी यात्रा नडियाद में समाप्त हुई। श्री पटेल के साथ इस यात्रा में... Read More

भारत के माननीय राष्ट्रपति ने महात्मा गांधी, राम मनोहर लोहिया और पं. दीन दयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण किया.

भारत के माननीय राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने 7 मार्च, 2021 को बेलाताल दमोह में महात्मा गांधी, राम मनोहर लोहिया और पंडित दीन दयाल उपाध्याय की कांस्य प्रतिमाओं का वस्तुतः उद्घाटन किया। प्रतिमाओं को प्रख्यात मूर्तिकार पद्मश्री श्री राम सुतार द्वारा गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति के सहयोग से बनाया है। माननीय राष्ट्रपति ने मध्यप्रदेश में दमोह जिले के सिंगोरगढ़ किले में संरक्षण कार्यों का भी उद्घाटन किया और मध्य प्रदेश में दमोह जिले के सिंगरमपुर गांव में सिंगोरगढ़ किले के संरक्षण कार्यों की आधारशिला रखी. माननीय राष्ट्रपति ने राज्य स्तरीय आदिवासी सम्मेलन को भी संबोधित किया। कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग द्वारा किया गया था। राष्ट्रपति ने गांव सिंगरमपुर में रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की.

"शांति पर चिंतन” पर किर्गिस्तान के साथ वार्ता

5 फरवरी, 2021
संवाद का विषय "पीस मैटर्स" था जहां निम्नलिखित प्रतिभागियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। 11 वक्ताओं ने विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। किर्गिस्तान के ऑनलाइन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. एलिरा तुर्दुबायेवा ने चर्चा का समन्वय किया। डॉ. वेदाभ्यास कुंडू, कार्यक्रम अधिकारी, ने प्रतिभागियों के साथ सत्र का संचालन किया।

मध्यस्थता' और बॉडी लेन्गुएग्ज

श्रृंखला IV
'मध्यस्थता' और बॉडी लेन्गुएग्ज पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित वक्ता, ऑस्ट्रेलिया के साइमन हाउडेन ने मध्यस्थता पर विभिन्न मुद्दों पर बात की
11 फरवरी, 2021
उन्होंने कहा,"मध्यस्थ की जिम्मेदारी सुरक्षित स्थान बनाना है जहां लोगों को लगता है कि वे संवाद कर सकते हैं। लोग अक्सर शिक्षित हो जाते हैं। लेकिन शिक्षा मात्र एक उपकरण है। यह आपको ज्ञान देता है, लेकिन उस ज्ञान को व्यवहार में लाने की जरूरत है।

सीरीज v
सुश्री रॉबर्टा वॉल, एक मध्यस्थ और कोच अहिंसक संचार व संघर्ष समाधान
11 फरवरी, 2021
उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर मध्यस्थ को यह सब जानने की जरूरत नहीं है। विश्व आज हर जगह संघर्ष से भरा है और मध्यस्थों को शांतिपूर्ण संचारक बनने की इच्छा होनी चाहिए"

सीरीज III अधिवक्ता, मध्यस्थ, सुलहकर्ता, गोल्फर एवं शांतिदूत श्री विक्रम सिंह ने भाग लिया।

10 फरवरी, 2021
उन्होंने कहा, "विवादों का समाधान पक्षों में परस्पर ही सबसे अच्छा होता है। जब अहंकार, गलत संचार और ऐसी अन्य चीजें एक संवाद में बाधा डालती हैं, तब मध्यस्थता शुरू होती है। मध्यस्थता सभी परिस्थितियों के आसपास केंद्रित बातचीत के बारे में है। यह एक अनौपचारिक प्रक्रिया है जो सड़क, स्कूल, पार्क कहीं भी हो सकती है। मध्यस्थों को प्रशिक्षित लोगों की नहीं बल्कि मध्यस्थता की मानसिकता वाले लोगों की आवश्यकता है।

सीरीज II - सुश्री इरम मजीद ,कार्यकारी निदेशक एशिया पैसिफिक सेंटर फॉर आर्बिट्रेशन एंड मीडिएशन, दिल्ली

8 फरवरी, 2021
अन्य बातों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि "मुकदमा इस बारे में है कि कौन सही है जबकि मध्यस्थता इस बारे में है कि क्या सही है। मध्यस्थता जीवन का एक तरीका है। यह मानव-मानव संबंध के बारे में है और इसलिए मूल्यांकन को हतोत्साहित करता है। मध्यस्थता का उद्देश्य मुद्दों के पीछे अंतर्निहित हितों का पता लगाना है

मध्यस्थता पर संवाद श्रृंखला श्रृंखला I - पेरू से संघर्ष समाधान के वैकल्पिक तंत्र विशेषज्ञ, श्री गुस्तावो अनाय सेंटेनो और TEDx के अध्यक्ष और शांति और संघर्ष अध्ययन के विशेषज्ञ, जापान की सुश्री एलिजाबेथ कैथरीन गरारा वक्ता थीं।

6 फरवरी, 2021
मध्यस्थता, बातचीत की एक प्रक्रिया है जिसमें एक तीसरा पक्ष शामिल होता है. इसके माध्यम से यह पता चलता है कि मध्यस्थता व्यक्तिगत स्तर के साथ-साथ संस्थागत स्तर पर भी हो सकती है। मध्यस्थ बनने के लिए, इस प्रक्रिया में कई अवांछित चीजों को छोड़ना होगा।

कला के माध्यम से तिहाड़ के कैदियों ने दी 'बा' को श्रद्धांजलि

समीति ने 22 फरवरी, 2021 को तिहाड़ जेल सीजे -4 और दिल्ली अचीवर्स के इनर व्हील क्लब के सहयोग से कस्तूरबा गांधी की 77 वीं पुण्यतिथि मनाई. इसमें कैदियों ने स्वतंत्रता संग्राम के दिग्गजों - महात्मा गांधी, कस्तूरबा गांधी और आचार्य विनोबा भावे को पेंटिंग बनाकर चित्रों के माध्यम से श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम का संचालन सीजे-4 में डॉ. मंजू अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम में सीजे-4 स्कूल ऑफ आर्ट्स के 48 कैदियों ने भाग लिया।

'साथी मध्यस्थता: विवाद समाधान के लिए एक रचनात्मक दृष्टिकोण' पर कार्यशाला

18 फरवरी, 2021, उन्नत भारत अभियान यूबीए, एसआरसीएएसडब्ल्यू और अंग्रेजी और जैव रसायन विभाग के सहयोग से
इस संवाद का मुख्य उद्देश्य युवा लोगों में ध्यान क्षमताओं का विकास करना और रिश्तों के सामंजस्यपूर्ण परिवर्तन को सुनिश्चित करना था। कार्यशाला के प्रमुख वक्ताओं में शामिल थे: डॉ. वेदभ्यास कुंडू, कार्यक्रम अधिकारी, जीएसडीएस; श्री गुलशन गुप्ता, उत्तर-पूर्व समन्वयक। बातचीत के दौरान उनसे लोगों से उन संघर्षों के बारे में पूछा जिनका वे सामना और उनका समाधान कैसे करते हैं। फिर उन्होंने सहकर्मी मध्यस्थता के महत्व और प्रभावी ढंग से एक सहकर्मी मध्यस्थ बनने के तरीके के बारे में बताया। उन्होंने उन गुणों पर भी चर्चा की जो एक सहकर्मी मध्यस्थ के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने अहिंसा और सहकर्मी मध्यस्थता को बहुत खूबसूरती से जोड़ा।

अपने अनुयायियों की नजर से गांधी - एक प्रतिबिंब

12 फरवरी, 2021, मालवीय शांति अनुसंधान केंद्र, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सहयोग से
“गांधी अपने अनुयायियों की नजर से शीर्षक वाले कार्यक्रम में समिति के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. वेदव्यास कुंडू, ने दो प्रख्यात दिग्गजों और गांधीवादी विचारकों, बाबा आमटे और नटवर ठक्कर पर अपने विचार रखे। डॉ. कुंडू ने लोगों और समाज की मुक्ति के लिए इन दिग्गजों के अपार निस्वार्थ योगदान पर चर्चा की।

संचार के गांधीवादी दृष्टिकोण के माध्यम से संघर्ष क्षमता को बढ़ावा देना" विषय पर छठा अंतर्राष्ट्रीय ई-संवाद

20 जनवरी 2021
गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति एमिटी स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन के सहयोग से इस चर्चा का मुख्य एजेंडा विवादों के समाधान में अहिंसक संचार का महत्व था। पैनल में प्रो. साइमन हाउडेन (ऑस्ट्रेलिया), प्रो. ड्रिसिया चौइट (मोरक्को), सुश्री एलिजाबेथ कैथरीन गामरा (जापान), प्रो. फातिमा हैदरी (अफगानिस्तान), श्री दीपंकर श्री ज्ञान (निदेशक जीएसडीएस), डॉ वेदव्यास कुंडू (कार्यक्रम अधिकारी, जीएसडीएस) और डॉ अंशु अरोड़ा जैसे विभिन्न वक्ता शामिल थे। ),

समकालीन युग में गांधीवादी नैतिकता का पुनरीक्षण" पर पांचवां अंतर्राष्ट्रीय ई-संवाद

इस ई सम्वाद में समिति निदेशक श्री दीपंकर श्री ज्ञान ने स्वागत भाषण दिया. समिति की पूर्व उपाध्यक्ष श्रीमती तारा गांधी भट्टाचार्जी, डॉ विद्या जैन, संयोजक, अहिंसा आयोग, अंतर्राष्ट्रीय शांति अनुसंधान संघ (आईपीआरए) और प्रो. लेस्टर आर. कुर्तज़, सार्वजनिक समाजशास्त्र प्रोफेसर जॉर्ज मेसन विश्वविद्यालय, यूएसए प्रमुख वक्ता के तौर पर उपस्थित थीं। इस सत्र में दो युवा वक्ताओं जापान के सोका विश्वविद्यालय से सुश्री येन फोबे मोक सीन और श्री विदुर भरतराम, फोटोग्राफर और फिल्म निर्माता ने भी अपने दृष्टिकोण साझा किए। डॉ. एन राधाकृष्णन, गांधीवादी विचारक, शांति-कार्यकर्ता, शिक्षक और लेखक व पूर्व निदेशक, गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति ने सत्र की अध्यक्षता की।

गांधी-सुभाष संबंध का संवाद आयाम

गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति द्वारा केजीआईडी, मणिपुर के सहयोग से समिति द्वारा डॉ बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और कस्तूरबा गांधी विकास संस्थान, मणिपुर के सहयोग से 23 जनवरी, 2021 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 124वीं जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। प्रो. सलिल मिश्रा, प्रति-कुलपति, डॉ. बीआर अम्बेडकर विश्वविद्यालय ने मुख्य भाषण दिया।

स्वामी विवेकानंद की 158वीं जयंती के अवसर पर "स्वयं को जानो" पर आभासी संवाद

इस अवसर पर गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति द्वारा SABDAM और राज्य बाल भवन असम के सहयोग से विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, असम प्रांत की सुश्री बरनाली चक्रवर्ती मुख्य वक्ता थीं।

'मेकिंग ऑफ ए हिंदू पैट्रियट' पुस्तक का विमोचन

हर आनंद पब्लिशर्स के सहयोग से सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज द्वारा प्रकाशित डॉ. जितेंद्र कुमार बजाज और प्रो. एम. डी. श्रीनिवास द्वारा लिखित 'मेकिंग ऑफ ए हिंदू पैट्रियट' की पुस्तक विमोचन में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत मुख्य अतिथि थे।

लार्ड भीखू पारेख द्वारा “गांधी की अहिंसा कितनी अहिंसक है” विषय पर लार्ड भीखू पारेख द्वारा शांति और अहिंसक व्याख्यान

गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति अहिंसक व्याख्यान श्रृंखला के तहत समिति ने 18 दिसंबर, 2020 को"गांधी की अहिंसा कैसे अहिंसक है" पर एक व्याख्यान का आयोजन किया. पद्म भूषण लार्ड भीखू पारेख ने ऑनलाइन व्याख्यान दिया, जिसकी अध्यक्षता प्रोफेसर विद्या जैन, संयोजक, अहिंसा आयोग और अंतर्राष्ट्रीय शांति अनुसंधान संघ ने की।

लद्दाखी कला और शिल्प के संरक्षण और संवर्धन पर ऑनलाइन कार्यशाला

लद्दाखी कला और शिल्प के संरक्षण और संवर्धन पर ऑनलाइन कार्यशाला में लद्दाखी शिल्प के प्रशिक्षण और उत्पादन जैसे शॉल, कढ़ाई के सामान, सजावटी सामान, पारंपरिक बुना हुआ पहनने के उत्पाद आदि में लगी 30 जनजाती छात्राओं ने भाग लिया। कार्यशाला में स्वदेशी शिल्प के प्रचार और संरक्षण के लिए बनाये गए अपने शिल्प का प्रदर्शन किया।समिति के पूर्व सलाहकार श्री बसंत सिंह, इस अवसर पर विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित थे।

स्वामी विवेकानंद, भारतीय संस्कृति और वैश्विक शांति पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

सोसाइटी फॉर सोशल एम्पावरमेंट एंड इंडियन काउंसिल ऑफ फिलॉसॉफिकल रिसर्च, नई दिल्ली द्वारा 11-13 दिसंबर, 2020 तक "स्वामी विवेकानंद, भारतीय संस्कृति और वैश्विक शांति" पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति और चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी, हरियाणा के सौजन्य से आयोजित इस संगोष्ठी में इतिहासकारों, शिक्षाविदों, लेखकों ने विभिन्न विषयों पर आधारित सत्रों में अपनी बात रखी।

भारत निर्वाचन आयोग के प्रतिनिधियों का गांधी दर्शन दौरा।

भारत के चुनाव आयोग का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसमें उत्तर पश्चिम दिल्ली और मध्य दिल्ली के उप चुनाव आयुक्त शामिल थे ने अन्य प्रतिनिधियों के साथ 12 नवंबर, 2020 को गांधी दर्शन का दौरा किया। उन्होंने डोम थिएटर और 360° वीडियो-इमर्सिव अनुभव का दौरा किया। समिति निदेशक श्री दीपंकर श्री ज्ञान ने गांधी दर्शन में प्रतिनिधियों की मेजबानी की। डीएसटी के श्री सच्चिदानंद स्वामी ने उन्हें 6 नवंबर, 2020 को केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन और संस्कृति मंत्री और समिति के उपाध्यक्ष श्री प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा उद्घाटित डिजिटल इंस्टॉलेशन के बारे में बताया।

अहिंसक संचार पर ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स का शुभारंभ

19 नवंबर, 2020 को गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति द्वारा आयोजित अहिंसक संचार पर ऑन-लाइन सर्टिफिकेट कोर्स के शुभारंभ के दौरान लिबरल आर्ट्स विश्वविद्यालय, बांग्लादेश (ULAB) के 100 प्रतिभागियों ने एक वेबिनार में भाग लिया। चर्चा की शुरुआत करते हुए, प्रो. जूड विलियम आर. जेनिलो, प्रोफेसर और MSJ-ULAB के प्रमुख ने अपने संगठन और सहिष्णुता के मूल्य के बारे में बताया।

भारत के संविधान की 71वीं वर्षगांठ पर वेबिनार

भारत के संविधान की 71वीं वर्षगांठ पर वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लगभग 79 छात्रों, स्वयंसेवकों, एनयूएसआरएल के संकाय सदस्यों, वकीलों व अन्य लोगों की एक सभा को संबोधित करते हुए, मुख्य वक्ता न्यायमूर्ति विक्रमादित्य प्रसाद ने कहा कि महात्मा गांधी के विचारों और दृष्टि के प्रभाव को भारत के संविधान में देखा जा सकता है. समाजवाद से लेकर सर्वोदय तक, महिलाओं के कल्याण और अन्य मुद्दों व मानव जीवन के सभी पहलुओं पर गांधी जी के विचार दृष्टिगत होते हैं. वेबिनार के दौरान पूर्वाह्न 11.00 बजे भारतीय संविधान की प्रस्तावना को हिंदी और अंग्रेजी में पढ़ा गया। तीस जनवरी मार्ग पर स्थित गांधी स्मृति और गांधी दर्शन, राजघाट के दोनों परिसरों में कार्यरत समिति के सदस्य प्रस्तावना पढ़ने में शामिल हुए।

अहिंसक संचार व्याख्यान श्रृंखला

4 नवंबर, 2020: व्याख्यान का फोकस इस बात पर था कि अहिंसक संचार के माध्यम से संघर्षों को कैसे सुलझाया जाए।
11 नवंबर, 2020: सीबीएसई के साथ चौथी व्याख्यान श्रृंखला क्रोध प्रबंधन पर केंद्रित थी। जीएसडीएस कार्यक्रमों के उत्तर पूर्व समन्वयक श्री गुलशन गुप्ता द्वारा आयोजित कार्यशाला में क्रोध के पीछे के मनोविज्ञान को समझने और क्रोध को शांत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
18 नवंबर, 2020: व्याख्यान का फोकस अहिंसक संचार के माध्यम से स्वयं को समझने पर था। आत्म-जागरूक होने की तकनीकों पर ध्यान केंद्रित किया गया था और कैसे हमारी आत्म-चर्चा और आंतरिक संवाद प्रकृति में अहिंसक होना चाहिए पर मंथन किया गया।

डिजिटल प्रदर्शनी और सर्कुलर डोम में 360° वीडियो-इमर्सिव अनुभव का उद्घाटन

महात्मा गांधी पर उनके जीवन, संघर्ष और उनके दृष्टिकोण व “मोहन से 'महात्मा' तक” की यात्रा को प्रदर्शित करने वाली एक इंटरैक्टिव डिजिटल प्रदर्शनी जिसमें 'मल्टीयूजर एंगेजमेंट के लिए स्मार्ट इंटरफेस' और एक गोलाकार गुंबद में 360 ° वीडियो-इमर्सिव अनुभव था, गाँधी दर्शन में स्थापित की गयी, जिसका उदघाटन माननीय संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं उपाध्यक्ष गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति श्री प्रह्लाद सिंह पटेल के साथ माननीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन द्वारा 6 नवंबर, 2020 को किया गया।

"अहिंसक संचार" पर किर्गिस्तान ऑनलाइन विश्वविद्यालय के साथ ऑनलाइन अभिविन्यास कार्यक्रम

गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति ने 20 अक्टूबर, 2020 को "अहिंसक संचार" पर किर्गिस्तान के ऑनलाइन विश्वविद्यालय के साथ एक ऑनलाइन अभिविन्यास कार्यक्रम की मेजबानी की। इस अभिविन्यास कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. वेदभ्यास कुंडू, कार्यक्रम अधिकारी, जीएसडीएस थे। ऑनलाइन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. एलिरा तुरबुदेवा ने स्वागत भाषण दिया। किर्गिस्तान और भारत के 63 प्रतिभागी वस्तुतः अभिविन्यास कार्यक्रम में शामिल हुए।

जंतर मंतर पर चरखे का प्रदर्शन

गांधी स्मृति और दर्शन समिति के आठ स्पिनरों ने 2 अक्टूबर, 2020 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में जंतर मंतर पर एक चरखा प्रदर्शन में भाग लिया, जो 2 अक्टूबर, 2020 को सादगी और आर्थिक स्वतंत्रता के उन संदेशों को उजागर करने के लिए आयोजित किया गया था, जिनके जरिये स्वतंत्रता संग्राम के दौरान गांधी ने नागरिकों के बीच जागृति पैदा की थी।

अहिंसक संचार पर समिति और सीबीएसई द्वारा निशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम आरम्भ

देश भर के छात्रों, शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और अभिभावकों तक पहुंचने की एक बड़ी पहल के रूप में, समिति ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के साथ मिलकर अहिंसक संचार पर अपना मुफ्त ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू किया। समिति अप्रैल 2020 से पाठ्यक्रम चला रही है।

वैश्विक महामारी संकट के समय में मानव एकजुटता की अनिवार्यता" पर अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार

वेबिनार के प्रथम दिन के सत्र की अध्यक्षता प्रो. प्रियांकर उपाध्याय, यूनेस्को चेयर फॉर पीस, मालवीय शांति अनुसंधान केंद्र, एफएसएस, बीएचयू, ने की। सम्मेलन की शुरुआत समिति की शोध अधिकारी श्रीमती गीता शुक्ला द्वारा दिए गए स्वागत भाषण से हुई। वेबिनार में 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया। द्वितीय दिन "यंग रिसर्चर्स फोरम" में दुनिया के विभिन्न हिस्सों के वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए।.

सत्याग्रह के माध्यम से स्वराज के उनके दर्शन को आकार देने में यूरोप और अफ्रीका के माध्यम से महात्मा गांधी की यात्रा" पर आभासी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन

इस अवसर पर भारत सरकार के विदेश राज्य मंत्री श्री वी मुरलीधरन मुख्य अतिथि थे। वेबिनार में 65 प्रतिभागियों ने भाग लिया जिसमें श्रीमती इला गांधी, अध्यक्ष गांधी विकास ट्रस्ट (डरबन), दक्षिण अफ्रीका जैसे वक्ता शामिल थे। मुख्य वक्ताओं में वीरेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष (एआरएसपी); अनूप मुद्गल, अध्यक्ष, डीआरआरसी; श्री श्याम परांडे, महासचिव एआरएसपी श्री दीपंकर श्री ज्ञान, निदेशक जीएसडीएस उपस्थित थे।

अहिंसक संचार के माध्यम से ऑनलाइन नफरत की बातों का सामना करने पर एक अंतरराष्ट्रीय ई-सम्मेलन

ई-कॉन्क्लेव की अध्यक्षता प्रो जगतार सिंह [समन्वयक, मीडिया और सूचना विश्वविद्यालय नेटवर्क ऑफ इंडिया (मिलुनी)] ने की। कॉन्क्लेव में अन्य वक्ताओं में शामिल थे: श्री एल्टन ग्रिज़ल (कार्यक्रम विशेषज्ञ यूनेस्को, पेरिस); श्री ब्रैम वान हावर (कार्यक्रम प्रबंधन विशेषज्ञ, यूएनएओसी, न्यूयॉर्क), सुश्री सारा गाबाई (संचार विशेषज्ञ, यूरोपीय संघ स्विच-एशिया), सुश्री महा बश्री (एसोसिएट प्रोफेसर,संयुक्त अरब अमीरात) और श्री मैथ्यू जॉनसन (निदेशक शिक्षा, मीडिया स्मार्ट, कनाडा) उस दिन के माननीय वक्ता थे। विश्व के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 90 लोग सम्मेलन में शामिल हुए।

शांति शिक्षा पर चौथा अंतर्राष्ट्रीय ई-संवाद - एक न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण भविष्य का निर्माण

कार्यक्रम का मार्गदर्शन प्रो. विद्या जैन (संयोजक, अहिंसा आयोग, आईपीआरए) द्वारा किया गया; डॉ. जेनेट गर्सन (शिक्षा निदेशक, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑन पीस एजुकेशन, यूएसए) की अध्यक्षता में प्रो. टोनी जेनकिंस (प्रबंध निदेशक, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑन पीस एजुकेशन, यूएसए), प्रोफेसर हर्बर्ट बी रोसाना (एसोसिएट डीन, ग्रेजुएट स्कूल, बिकोल विश्वविद्यालय, फिलीपींस) और डॉ स्टीव शर्रा (शिक्षा नीति विश्लेषक और शांति शिक्षा, मलावी) द्वारा व्यक्तिगत सत्रों को सम्बोधित किया गया। वेबिनार में 62 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

“हमारी शिक्षा नीति में महात्मा गांधी के प्रभाव” पर वेबिनार

हमारी शिक्षा नीति में महात्मा गांधी के प्रभाव पर एक ई-वेबिनार आयोजित किया गया. जहां श्री विजय प्रकाश, आईएएस (सेवानिवृत्त), और प्रोफेसर पीके मिश्रा, आईआईटी बीएचयू ने "वंचित समुदायों के छात्रों के लिए नवाचार के माध्यम से उद्यमिता" और "लैब टू लैंड: इनोवेशन एंड इट्स प्रैक्टिकल इंप्लीकेशंस इन एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस: ए गांधियन अप्रोच"। पर लगभग 54 प्रतिभागियों की सभा को संबोधित किया।

"मैं अपने दैनिक जीवन में अहिंसा को कैसे विकसित करूं?" विषय पर अंतर्राष्ट्रीय ई-संवाद

25 जुलाई, 2020 को आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय ई-संवाद में कई देशों के 70 प्रतिभागियों ने भाग लिया। डॉ विद्या जैन, पूर्व एसजी एपीआरए और संयोजक, अहिंसा आयोग, आईपीआरए ने पूरी चर्चा का मार्गदर्शन किया। डॉ. बर्नेडेट मुथिएन शांति शोधकर्ता, कवि ने सत्र की अध्यक्षता की।

तमिल भाषा में "अहिंसक संचार" पर ऑनलाइन पाठ्यक्रम का शुभारम्भ

श्रीमती निरुपमा कोटरू, संयुक्त सचिव संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने 20 जुलाई को गांधी स्मृति एवम दर्शन समिति के सहयोग से पीएसजी कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस, कोयंबटूर द्वारा अनुवादित तमिल में "अहिंसक संचार" ऑन-लाइन पाठ्यक्रम का वर्चुअल शुभारंभ किया।

कारीगरी और समृद्धि ग्राम्य-जीवन (शिल्पकार का सतत ग्रामीण जीवन)

समिति द्वारा आयोजित "कारीगरी और समृद्धि ग्राम्य-जीवन (शिल्पकार का सतत ग्रामीण जीवन) पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया. श्री लक्ष्मी दास, उपाध्यक्ष हरिजन सेवक संघ और समिति के कार्यकारिणी सदस्य ने 86 प्रतिभागियों की सभा को संबोधित किया।

माइंडफुलनेस: ए वे टुवर्ड्स बैलेंस एंड हारमनी"

केएएमएस कॉन्वेंट स्कूल, नई दिल्ली के सहयोग से "माइंडफुलनेस: ए वे टुवर्ड्स बैलेंस एंड हारमनी " पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार में ब्रह्माकुमारी बहन विधात्री सहित सुश्री सोनिया सैनी (प्रिंसिपल-केएएमएस कॉन्वेंट स्कूल), डॉ वेदाभ्यास कुंडू (कार्यक्रम अधिकारी,), श्री राजदीप पाठक (कार्यक्रम कार्यकारी) और सुश्री कनक कौशिक (पाठ्यक्रम प्रभारी) उपस्थित थे।

स्ट्रोक के रोगियों में फिजियोथेरेपी के माध्यम से न्यूरो रिहैबिलिटेशन और वेलनेस

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में न्यूरोलॉजी विभाग के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ राहुल शर्मा के साथ 15 जुलाई, 2020 को गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति द्वारा "स्ट्रोक मरीजों में फिजियोथेरेपी के माध्यम से न्यूरो रिहैबिलिटेशन और वेलनेस " पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया। इसमें प्राकृतिक चिकित्सक और बनारसीदास चांदीवाला इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोथेरेपी के छात्र डॉ अमन कांडा ने भी भाग लिया. वेबिनार में 67 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

प्रभावी स्वयंसेवा के लिए कौशल विकास

समिति ने भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय (भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय), सोनीपत, हरियाणा सरकार के डीन छात्र कल्याण विभाग के सहयोग से 7-8 जुलाई, 2020 को प्रभावी स्वयंसेवा के लिए कौशल विकास पर एक ई-कार्यशाला का आयोजन किया। विश्वविद्यालय की कुलपति, प्रो. सुषमा यादव कार्यक्रम की संरक्षक थीं। विशिष्ट वक्ताओं में समिति निदेशक श्री दीपंकर श्री ज्ञान,कार्यक्रम अधिकारी डॉ. वेदभ्यास कुंडू, श्री गुलशन गुप्ता, पूर्वोत्तर समन्वयक शामिल थे.

माइंडफुलनेस: ए वे टुवर्ड्स बैलेंस एंड हारमनी" पर युवाओं, बच्चों, महिलाओं, जेल के कैदियों के लिए पाठ्यक्रम का शुभारंभ

समिति ने धर्माचार्य श्री शांतम सेठ (माइंडफुलनेस टीचर, अहिंसा ट्रस्ट) के साथ "माइंडफुलनेस: ए वे टुवर्ड्स बैलेंस एंड हारमनी" पर एक चर्चा का आयोजन किया; सिस्टर रमा (वरिष्ठ राजयोगी संकाय, ब्रह्माकुमारी); श्री दीपंकर श्री ज्ञान, निदेशक गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति; डॉ. वेदाभ्यास कुंडू, कार्यक्रम अधिकारी, और सुश्री कनक कौशिक, पाठ्यक्रम प्रभारी ने चर्चा में अपने विचार रखे. 89 प्रतिभागियों ने शुभारम्भ कार्यक्रम में भाग लिया।

संघर्ष समाधान, वार्ता और मध्यस्थता में महिलाओं की बढ़ती दृश्यता' पर अंतर्राष्ट्रीय ई-संवाद

गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति द्वारा 13 जून, 2020 को "संघर्ष समाधान, वार्ता और मध्यस्थता में महिलाओं की बढ़ती दृश्यता" पर एक अंतर्राष्ट्रीय ई-संवाद का आयोजन किया गया था। डॉ विद्या जैन, पूर्व एसजी एपीपीआरए और संयोजक, अहिंसा आयोग, आईपीआरए (अंतर्राष्ट्रीय शांति अनुसंधान संघ); डॉ. बर्नेडेट मुथिएन, दक्षिण अफ्रीका में सहायक, शोधकर्ता और कवि, अफ्रीकी शांति अनुसंधान संघ के संस्थापक; प्रो. मैट मेयर, सह-महासचिव, आईपीआरए; प्रो. जेनेट गर्सन, (पीस एजुकेटर) शिक्षा निदेशक, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑन पीस एजुकेशन और सुश्री दीना लखहल, प्रोग्राम ऑफिसर, ग्लोबल नेटवर्क ऑफ वूमेन पीस-बिल्डर्स प्रमुख वक्ता थे।

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